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राजस्थान: वन और वन्यजीव
Shishya का नोट: नीचे दिए आधिकारिक दस्तावेज़ों से ही AI की मदद से लिखा गया, फिर उन्हीं से मिलाकर जाँचा गया (हर संख्या, तारीख़ और नाम)। हिंदी पाठ AI अनुवाद है, जिसे संख्याओं, नामों और अर्थ की स्वचालित जाँच से गुज़ारा गया है। आँकड़े उसी वर्ष के हैं जो दस्तावेज़ में लिखा है।
राजस्थान में शुष्क मरुस्थलों से लेकर वनाच्छादित भूदृश्यों तक विविध पारितंत्र पाए जाते हैं। राज्य की वन और वन्यजीव व्यवस्था राजस्थान वन अधिनियम 1953 और राजस्थान वन नीति-2023 द्वारा संचालित है, जिसका लक्ष्य अगले 20 वर्षों में वनस्पति आवरण को राज्य के भौगोलिक क्षेत्रफल के 20 प्रतिशत तक बढ़ाना है।
वन आवरण और क्षेत्र
भारत वन स्थिति रिपोर्ट-2023 के अनुसार राजस्थान का वन आवरण 16,548.21 वर्ग किमी है, जो कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 4.84 प्रतिशत है। वृक्ष आवरण 10,841.12 वर्ग किमी है। इस प्रकार वन और वृक्ष आवरण का संयुक्त योग 27,389.33 वर्ग किमी है, जो राज्य के भौगोलिक क्षेत्रफल का 8 प्रतिशत है। राज्य में कुल अभिलिखित वन क्षेत्र 33,020.32 वर्ग किमी है, जो भौगोलिक क्षेत्रफल का 9.65 प्रतिशत है। राजस्थान वन अधिनियम 1953 के प्रावधानों के अंतर्गत वन क्षेत्र को आरक्षित वन, संरक्षित वन और अवर्गीकृत वन में वर्गीकृत किया गया है, जो कुल वन क्षेत्र का क्रमशः 36.94, 56.54 और 6.51 प्रतिशत हैं।
राष्ट्रीय उद्यान और बाघ अभयारण्य
राजस्थान में 3 राष्ट्रीय उद्यान (रणथंभौर, मुकुंदरा और केवलादेव), 5 बाघ अभयारण्य (टाइगर रिज़र्व) और 26 वन्यजीव अभयारण्य हैं। इसके अतिरिक्त 39 संरक्षण आरक्षित क्षेत्र और उदयपुर, कोटा, जयपुर और जोधपुर में स्थित 4 जैविक उद्यान हैं।
- रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान: सवाई माधोपुर से 14 किमी दूर अरावली और विंध्य पर्वतमालाओं के संगम पर स्थित। यह 392 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला है।
- मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिज़र्व: कोटा से 50 किमी दूर स्थित। इसका कोर क्षेत्र 417 वर्ग किमी और बफर ज़ोन 342.82 वर्ग किमी है। बाघों को प्रायः रणथंभौर से यहाँ स्थानांतरित किया जाता है।
- सरिस्का टाइगर रिज़र्व: राजस्थान पर्यटन इसे बाघों को सफलतापूर्वक स्थानांतरित करने वाला विश्व का पहला बाघ अभयारण्य बताता है। यह दिल्ली से 200 किमी और जयपुर से 107 किमी दूर है। 1955 में अभयारण्य और 1979 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित, इसका कुल क्षेत्रफल 1,203 वर्ग किमी है, जिसमें से 881 वर्ग किमी कोर क्षेत्र के रूप में अधिसूचित है।
प्रमुख वन्यजीव अभयारण्य
राज्य में 26 वन्यजीव अभयारण्य हैं, जिनमें से कई विशिष्ट विशेषताओं के लिए उल्लेखनीय हैं:
- माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य: 288 वर्ग किमी उपोष्ण कटिबंधीय वन में फैला। यहाँ भारतीय लोमड़ी, पैंगोलिन, धूसर जंगली मुर्गी, धारीदार लकड़बग्घा और भारतीय तेंदुआ पाए जाते हैं।
- सोरसन वन्यजीव अभयारण्य: कोटा से 50 किमी दूर स्थित, यह 41 वर्ग किमी का पक्षी अभयारण्य है, जिसे सोरसन घास के मैदान के नाम से जाना जाता है।
- बस्सी वन्यजीव अभयारण्य: 1988 में स्थापित, यह विंध्य पर्वत श्रृंखला में स्थित है। इसमें आर्द्रभूमियाँ हैं और यह प्रवासी पक्षियों, विशेषकर सारस क्रेन, का स्थल है।
- सीतामाता वन्यजीव अभयारण्य: अरावली और विंध्याचल पर्वतमालाओं पर फैला, यह एकमात्र वन है जहाँ भवन-निर्माण योग्य सागौन के पेड़ पाए जाते हैं। लगभग 50 प्रतिशत पेड़ सागौन के हैं।
- चंबल घड़ियाल अभयारण्य: UP, MP और राजस्थान में फैला त्रि-राज्यीय संरक्षित क्षेत्र। इसकी स्थापना 1983 में मगरमच्छों और घड़ियालों के संरक्षण के लिए की गई। यहाँ दुर्लभ, संकटग्रस्त घड़ियाल और गंगा नदी डॉल्फिन पाई जाती हैं।
- रामगढ़ विषधारी वन्यजीव अभयारण्य: बूंदी से 45 किमी दूर स्थित और 1982 में स्थापित, यह 252 वर्ग किमी में फैला है और रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान के लिए बफर का काम करता है।
आर्द्रभूमियाँ और पक्षी अभयारण्य
राजस्थान पक्षी दर्शन और आर्द्रभूमि संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।
- केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान (भरतपुर): 29 वर्ग किलोमीटर की मानव-निर्मित आर्द्रभूमि, जिसमें 370 से अधिक पक्षी प्रजातियाँ दर्ज हैं; यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। शीत ऋतु में हरा सैंडपाइपर और सारस जैसे हज़ारों प्रवासी जलपक्षी यहाँ आते हैं।
- रामसागर अभयारण्य: रामसागर झील के किनारे स्थित, इसमें दुर्लभ मछलियों, मगरमच्छों और जल सर्पों सहित जलीय प्रजातियाँ हैं। यह जलकौवों, सफेद छाती वाली जलमुर्गियों और जकानाओं का स्थल है।
- बंध बारेठा: भरतपुर के शासकों का एक पुराना वन्यजीव आरक्षित क्षेत्र, जो वर्तमान में वन विभाग के अधीन है। ककुंद नदी पर बाँध का निर्माण महाराज जसवंत सिंह ने 1866 ई. में शुरू कराया और महाराज राम ने पूरा कराया।
संरक्षण पहल और नीतियाँ
राजस्थान वन नीति-2023 पारिस्थितिक सुरक्षा बढ़ाने के लिए प्राकृतिक वनों, वन्यजीवों और जैव विविधता की सुरक्षा पर केंद्रित है। प्रमुख पहलें हैं:
- एक पेड़ माँ के नाम: प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किया गया वृक्षारोपण अभियान; राज्य ने दिसंबर 2025 तक 8.21 करोड़ पौधों का लक्ष्य हासिल किया (मेरी लाइफ पोर्टल)।
- मिशन हरियालो राजस्थान: 2025-26 में (दिसंबर तक) 10 करोड़ के लक्ष्य के विरुद्ध 11.64 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए।
- संयुक्त वन प्रबंधन कार्यक्रम: वन संरक्षण और पारि-विकास के लिए 2,605 ग्राम वन सुरक्षा एवं प्रबंध समितियाँ गठित की गई हैं।
- पंच गौरव कार्यक्रम: 'एक जिला-एक वृक्ष प्रजाति' पहल के अंतर्गत चयनित पौध प्रजातियों के लिए 2025-26 में 1,175 लाख स्वीकृत किए गए।
- तितली पार्क: राजस्थान का पहला तितली पार्क उदयपुर क्षेत्र में स्थापित किया गया। यह 5 ज़ोन में बँटा है और इसमें राजस्थान में पाई जाने वाली 189 प्रजातियों में से रंग-बिरंगी तितलियों की 80 प्रजातियाँ हैं।
- राजस्थान CAMPA: प्रतिकरात्मक वनीकरण निधि अधिनियम, 2016 के अंतर्गत 14 सितंबर, 2018 को गठित। राष्ट्रीय CAMPA ने दिसंबर 2025 तक राजस्थान CAMPA को 2,676.25 करोड़ हस्तांतरित किए। 2025-26 के लिए वार्षिक संचालन योजना 286.14 करोड़ है।
- वनस्पति उद्यान: विश्व वानिकी वृक्ष उद्यान, जयपुर के आदर्श पर जोधपुर, बीकानेर, कोटा, उदयपुर, भरतपुर और अजमेर में विकसित किए जा रहे हैं।
आधिकारिक स्रोत (पढ़ने की तारीख़ के साथ)
- Economic Review 2025-26 (English) — Directorate of Economics & Statistics, Planning Department, Government of Rajasthan (released with State Budget 2026-27, Finance Department) · पढ़ा गया 27 Oct 2026
- Parks And Wildlife - Rajasthan Tourism — Department of Tourism, Government of Rajasthan · पढ़ा गया 27 Oct 2026
- Ajmer - Rajasthan Tourism — Department of Tourism, Government of Rajasthan · पढ़ा गया 27 Oct 2026
- Alwar - Rajasthan Tourism — Department of Tourism, Government of Rajasthan · पढ़ा गया 27 Oct 2026
- Baran - Rajasthan Tourism — Department of Tourism, Government of Rajasthan · पढ़ा गया 27 Oct 2026
- Bharatpur - Rajasthan Tourism — Department of Tourism, Government of Rajasthan · पढ़ा गया 27 Oct 2026
- Bikaner - Rajasthan Tourism — Department of Tourism, Government of Rajasthan · पढ़ा गया 27 Oct 2026
- Bundi - Rajasthan Tourism — Department of Tourism, Government of Rajasthan · पढ़ा गया 27 Oct 2026
- Chittorgarh - Rajasthan Tourism — Department of Tourism, Government of Rajasthan · पढ़ा गया 27 Oct 2026
- Dholpur - Rajasthan Tourism — Department of Tourism, Government of Rajasthan · पढ़ा गया 27 Oct 2026
- Forts - Rajasthan Tourism — Department of Tourism, Government of Rajasthan · पढ़ा गया 27 Oct 2026
- Jaipur - Rajasthan Tourism — Department of Tourism, Government of Rajasthan · पढ़ा गया 27 Oct 2026
- Jaisalmer - Rajasthan Tourism — Department of Tourism, Government of Rajasthan · पढ़ा गया 27 Oct 2026
- Karauli - Rajasthan Tourism — Department of Tourism, Government of Rajasthan · पढ़ा गया 27 Oct 2026
- Kota - Rajasthan Tourism — Department of Tourism, Government of Rajasthan · पढ़ा गया 27 Oct 2026
- Mount Abu - Rajasthan Tourism — Department of Tourism, Government of Rajasthan · पढ़ा गया 27 Oct 2026
- Rajsamand - Rajasthan Tourism — Department of Tourism, Government of Rajasthan · पढ़ा गया 27 Oct 2026
- Sawaimadhopur - Rajasthan Tourism — Department of Tourism, Government of Rajasthan · पढ़ा गया 27 Oct 2026
- Shekhawati - Rajasthan Tourism — Department of Tourism, Government of Rajasthan · पढ़ा गया 27 Oct 2026
- Tonk - Rajasthan Tourism — Department of Tourism, Government of Rajasthan · पढ़ा गया 27 Oct 2026
- Udaipur - Rajasthan Tourism — Department of Tourism, Government of Rajasthan · पढ़ा गया 27 Oct 2026
टॉपिक टेस्ट: वन और वन्यजीव
Shishya practice: 4 प्रश्न, जिनके उत्तर ऊपर के नोट में हैं — किसी पिछले पेपर के प्रश्न नहीं। पहले 2 उत्तरों के लिए खाते की ज़रूरत नहीं; फिर पूरा करने के लिए मुफ़्त साइन अप करें। आपके चुने उत्तर कहीं सेव नहीं होते।
प्रश्न 1 / 4
भारत वन स्थिति रिपोर्ट-2023 के अनुसार राजस्थान का वन आवरण कितने वर्ग किलोमीटर है?
प्रश्न 2 / 4
चंबल घड़ियाल अभयारण्य की स्थापना दलदली मगरमच्छों और घड़ियालों के संरक्षण के लिए किस वर्ष की गई थी?
प्रश्न 3 / 4
नोट में उल्लिखित सारिस्का टाइगर रिज़र्व का कुल क्षेत्रफल क्या है?
प्रश्न 4 / 4
संयुक्त वन प्रबंधन कार्यक्रम के अंतर्गत कितनी ग्राम वन सुरक्षा एवं प्रबंध समितियाँ गठित की गई हैं?