Upsarg aur Pratyay (उपसर्ग और प्रत्यय)
Overview
उपसर्ग और प्रत्यय हिंदी व्याकरण में शब्द-रचना (word formation) के दो मूलभूत अवयव हैं।
इस विषय की समझ न केवल व्याकरण प्रश्नों के लिए बल्कि अपठित गद्यांश में शब्द-अर्थ समझने और पर्यायवाची-विलोम प्रश्नों के लिए भी सहायक है। परीक्षा में सफलता के लिए आपको संस्कृत, हिंदी और विदेशी भाषाओं के प्रमुख उपसर्गों तथा कृत् व तद्धित प्रत्ययों को उदाहरण सहित याद रखना होगा।
Key Concepts
- उपसर्ग (Prefix) — वह शब्दांश जो किसी मूल शब्द के आरंभ में जुड़कर नया शब्द बनाता है और अर्थ में परिवर्तन या विशेषता लाता है। उपसर्ग स्वतंत्र रूप से प्रयुक्त नहीं होते।
- प्रत्यय (Suffix) — वह शब्दांश जो किसी मूल शब्द के अंत में जुड़कर नया शब्द बनाता है। प्रत्यय भी अकेले अर्थहीन होते हैं।
- उपसर्गों के स्रोत — हिंदी में उपसर्ग तीन स्रोतों से आते हैं: (1) संस्कृत उपसर्ग, (2) हिंदी के अपने उपसर्ग, (3) उर्दू/अरबी/फारसी/अंग्रेजी उपसर्ग।
- प्रत्ययों के प्रकार — दो मुख्य वर्ग: (1) कृत् प्रत्यय — धातु (क्रिया-मूल) में जुड़कर संज्ञा/विशेषण बनाते हैं; (2) तद्धित प्रत्यय — संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण में जुड़कर नया शब्द बनाते हैं।
- मूल शब्द पहचानना — परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है: "अभिमान में उपसर्ग क्या है?" यहाँ मूल = मान, उपसर्ग = अभि।
- एक उपसर्ग, अनेक अर्थ — 'अ' उपसर्ग कभी अभाव (अज्ञान = ज्ञान का अभाव) तो कभी निषेध (अशुद्ध) दर्शाता है।
- अर्थ-परिवर्तन की दिशा — उपसर्ग/प्रत्यय जोड़ने से शब्द का अर्थ विपरीत, व्यापक, संकुचित या भाववाचक हो सकता है।
Formulas / Key Facts
प्रमुख संस्कृत उपसर्ग (20 मुख्य)
| उपसर्ग | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| अ/अन् | अभाव, निषेध | अधर्म, अनपढ़ |
| अति | अधिक | अत्याचार, अतिशय |
| अधि | ऊपर, श्रेष्ठ | अधिकार, अध्यक्ष |
| अनु | पीछे, समान | अनुसार, अनुवाद |
| अप | बुरा, दूर | अपमान, अपयश |
| अभि | सामने, पास | अभिनय, अभिमान |
| आ | तक, से | आजीवन, आकर्षण |
| उप | समीप, गौण | उपकार, उपनाम |
| दुर्/दुस् | कठिन, बुरा | दुर्गम, दुष्कर |
| नि/निर् | बिना, बाहर | निर्दोष, निडर |
| परा | उल्टा, पीछे | पराजय, पराभव |
| परि | चारों ओर | परिवार, परिणाम |
| प्र | अधिक, आगे | प्रगति, प्रचार |
| प्रति | विरुद्ध, प्रत्येक | प्रतिदिन, प्रतिकूल |
| वि | विशेष, विपरीत | विज्ञान, विदेश |
| सम्/सं | साथ, अच्छा | संगीत, सम्मान |
| सु | अच्छा | सुपुत्र, सुगम |
| कु | बुरा | कुपुत्र, कुमार्ग |
प्रमुख हिंदी उपसर्ग
| उपसर्ग | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| अध | आधा | अधपका, अधमरा |
| उन | एक कम | उनतीस, उनचास |
| भर | पूरा | भरपूर, भरपेट |
| सु | अच्छा | सुडौल |
| दु | दो, बुरा | दुबला, दुगुना |
| बिन | बिना | बिनब्याहा |
| चौ | चार | चौराहा, चौपाया |
प्रमुख उर्दू/फारसी/अरबी उपसर्ग
| उपसर्ग | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| बे | बिना | बेईमान, बेकार |
| ला | बिना | लाचार, लापरवाह |
| बद | बुरा | बदनाम, बदसूरत |
| ना | नहीं | नालायक, नापसंद |
| हम | समान | हमउम्र, हमसफर |
| गैर | बिना | गैरहाजिर |
प्रमुख कृत् प्रत्यय (धातु + प्रत्यय → संज्ञा/विशेषण)
| प्रत्यय | उदाहरण |
|---|---|
| अक | लेखक (लिख्+अक), नायक |
| आवा | दिखावा, छलावा |
| आई | लड़ाई, पढ़ाई |
| आव | बहाव, घुमाव |
| आन | उड़ान, मिलान |
| आवट | सजावट, बनावट |
| आहट | घबराहट, चिल्लाहट |
| वाला | पढ़नेवाला, लिखनेवाला |
प्रमुख तद्धित प्रत्यय (संज्ञा/विशेषण + प्रत्यय)
| प्रत्यय | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| ता | भाववाचक | मानवता, सुंदरता |
| त्व | भाववाचक | मनुष्यत्व, महत्त्व |
| पन | भाववाचक | बचपन, लड़कपन |
| आई | भाववाचक | भलाई, बुराई |
| ई | संबंध | देहाती, शहरी |
| इक | संबंध | धार्मिक, सामाजिक |
| इत | युक्त | फलित, पुष्पित |
| वान/मान | युक्त | बलवान, बुद्धिमान |
Worked Examples
प्रश्न 1: 'अभिनय' शब्द में उपसर्ग और मूल शब्द बताइए।
हल:
- शब्द को तोड़ें: अभि + नय
- 'अभि' = उपसर्ग (संस्कृत), अर्थ = सामने
- 'नय' = मूल शब्द (नी धातु से, अर्थ = ले जाना/प्रस्तुत करना)
- उत्तर: उपसर्ग = अभि, मूल शब्द = नय
प्रश्न 2: 'सजावट' में प्रत्यय पहचानिए और बताइए यह कृत् है या तद्धित।
हल:
- शब्द विश्लेषण: सजा + आवट
- मूल = 'सजना' (क्रिया/धातु)
- 'आवट' क्रिया से जुड़कर भाववाचक संज्ञा बनाता है
- उत्तर: प्रत्यय = आवट, प्रकार = कृत् प्रत्यय
प्रश्न 3: 'बेईमान' में उपसर्ग कौन-सा है और किस भाषा का है?
हल:
- बे + ईमान
- 'बे' = उपसर्ग (फारसी), अर्थ = बिना/रहित
- ईमान = मूल शब्द (अरबी)
- उत्तर: उपसर्ग = बे (फारसी उपसर्ग)
Common Mistakes
गलत सोच: "अ" और "अन्" दो अलग-अलग उपसर्ग हैं। सही समझ: दोनों एक ही उपसर्ग हैं — स्वर से शुरू शब्दों में "अन्" (अन् + अधिकार = अनधिकार) और व्यंजन से शुरू में "अ" (अ + धर्म = अधर्म) लगता है।
गलत सोच: हर शब्द के आरंभिक अक्षर को उपसर्ग मान लेना। सही समझ: उपसर्ग हटाने पर भी सार्थक मूल शब्द बचना चाहिए। "आम" में "आ" उपसर्ग नहीं है क्योंकि "म" अर्थहीन है।
गलत सोच: "ता" और "त्व" प्रत्यय समान अर्थ देते हैं, कहीं भी लगा सकते हैं। सही समझ: दोनों भाववाचक बनाते हैं पर प्रयोग भिन्न है — "मानव + ता = मानवता" (हिंदी शैली), "मनुष्य + त्व = मनुष्यत्व" (संस्कृत शैली)।
गलत सोच: "वाला" प्रत्यय है। सही समझ: व्याकरणिक दृष्टि से "वाला" को कृत् प्रत्यय माना जाता है (पढ़ने + वाला), हालाँकि कुछ विद्वान इसे स्वतंत्र शब्द मानते हैं। परीक्षा में इसे प्रत्यय ही मानें।
गलत सोच: उर्दू उपसर्ग केवल उर्दू शब्दों में लगते हैं। सही समझ: "बे", "ला", "बद" आदि हिंदी मूल शब्दों के साथ भी प्रयुक्त होते हैं — "बेढंगा", "लापता"।
Quick Reference
- उपसर्ग = शब्द के आगे; प्रत्यय = शब्द के पीछे
- संस्कृत के 20+ उपसर्ग याद करें: अ, अति, अधि, अनु, अप, अभि, आ, उप, दुर्, नि, परा, परि, प्र, प्रति, वि, सम्, सु, कु
- फारसी उपसर्ग: बे, बद, ना, ला, हम, गैर → प्रायः "बिना/बुरा" अर्थ
- कृत् प्रत्यय = धातु (क्रिया) से; तद्धित प्रत्यय = संज्ञा/विशेषण से