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Upsarg aur Pratyay

Prefixes and suffixes in Hindi.

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Upsarg aur Pratyay (उपसर्ग और प्रत्यय)

Overview

उपसर्ग और प्रत्यय हिंदी व्याकरण के शब्द-रचना (word formation) भाग का अनिवार्य अंश है। परीक्षा में शब्द को तोड़कर मूल शब्द, उपसर्ग या प्रत्यय पहचानना, नए शब्द बनाना और अर्थ-परिवर्तन समझना — इन तीनों कौशलों की परख होती है।

इस विषय की समझ से Shabd Bhed, Sandhi-Samas और Paribhashik Shabdavali जैसे अन्य प्रकरण भी आसान हो जाते हैं। मूल शब्द में उपसर्ग या प्रत्यय जोड़ने पर अर्थ बदल जाता है — यही केंद्रीय अवधारणा है जिसे परीक्षार्थी को आत्मसात करना चाहिए।


Key Concepts

  • उपसर्ग (Prefix): वे शब्दांश जो मूल शब्द के आगे जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन या विशेषता लाते हैं। उदाहरण: अ + न्याय = अन्याय (न्याय का अभाव)
  • प्रत्यय (Suffix): वे शब्दांश जो मूल शब्द के पीछे जुड़कर नया शब्द बनाते हैं। उदाहरण: मीठा + आस = मिठास (गुणवाचक संज्ञा)
  • उपसर्ग स्वतंत्र अर्थ नहीं रखते — अकेले प्रयोग में नहीं आते; प्रत्यय भी अधिकतर ऐसे ही होते हैं।
  • उपसर्ग के तीन स्रोत:
    1. संस्कृत उपसर्ग (तत्सम)
    2. हिंदी उपसर्ग (तद्भव/देशज)
    3. उर्दू/अरबी-फ़ारसी उपसर्ग (विदेशी)
  • प्रत्यय के दो मुख्य भेद:
    1. कृत् प्रत्यय — क्रिया (धातु) में जुड़कर संज्ञा/विशेषण बनाते हैं।
    2. तद्धित प्रत्यय — संज्ञा/विशेषण/सर्वनाम में जुड़कर नया शब्द बनाते हैं।
  • एक ही उपसर्ग अलग-अलग अर्थ दे सकता है: 'प्र' = आगे (प्रगति), अधिक (प्रबल)।
  • प्रत्यय जोड़ने पर मूल शब्द की ध्वनि बदल सकती है: सुंदर + ता = सुंदरता; मीठा + आस = मिठास।

Formulas / Key Facts

प्रमुख संस्कृत उपसर्ग (20)

उपसर्गअर्थउदाहरण
अ / अन्अभाव, निषेधअधर्म, अनपढ़
अतिअधिकअत्याचार, अतिशय
अधिऊपर, श्रेष्ठअधिकार, अध्यक्ष
अनुपीछे, समानअनुसार, अनुभव
अपबुरा, दूरअपमान, अपव्यय
अभिसामने, अधिकअभिनय, अभिमान
आतक, ओरआजन्म, आकर्षण
उपनिकट, सहायकउपदेश, उपवन
दुर्/दुस्बुरा, कठिनदुर्गम, दुष्कर्म
निनीचे, भीतरनिवास, निबंध
निर्/निस्बिना, बाहरनिर्दोष, निश्चय
पराउल्टा, पीछेपराजय, पराभव
परिचारों ओरपरिवार, परिणाम
प्रआगे, अधिकप्रगति, प्रबल
प्रतिविरुद्ध, हरप्रतिदिन, प्रतिकूल
विविशेष, बिनाविजय, विदेश
सम्साथ, पूर्णसंगम, संतोष
सुअच्छासुपुत्र, सुगम
कुबुराकुपुत्र, कुमार्ग
अवनीचे, बुराअवगुण, अवनति

प्रमुख हिंदी उपसर्ग

उपसर्गअर्थउदाहरण
अन/अनिषेधअनजान, अनहोनी
औबुरा, हीनऔगुण, औसर
उनएक कमउनतीस, उनसठ
भरपूराभरपूर, भरपेट
सुअच्छासुडौल
दुदो/बुरादुबला, दुगुना
चौचारचौराहा, चौपाया

प्रमुख उर्दू/फ़ारसी उपसर्ग

उपसर्गअर्थउदाहरण
नानहींनालायक, नापसंद
बदबुराबदनाम, बदमाश
बेबिनाबेईमान, बेकार
लाबिनालापरवाह, लाचार
हमसाथहमदर्द, हमउम्र
ख़ुशअच्छाख़ुशबू, ख़ुशमिज़ाज
सरमुख्यसरदार, सरपंच

प्रमुख कृत् प्रत्यय (धातु + प्रत्यय)

प्रत्ययउदाहरण
अकलेखक (लिख्+अक), गायक
अनपठन, लेखन
आपूजा, सेवा
आईलड़ाई, कटाई
आवबहाव, दिखावा
आवटसजावट, रुकावट
आहटघबराहट, चिल्लाहट
इयाडाकिया, रसोइया
औता/औतीसमझौता, मनौती

प्रमुख तद्धित प्रत्यय (संज्ञा/विशेषण + प्रत्यय)

प्रत्ययकार्यउदाहरण
ताभाववाचक संज्ञामूर्खता, सुंदरता
त्वभाववाचक संज्ञामनुष्यत्व, गुरुत्व
पनभाववाचक संज्ञाबचपन, लड़कपन
आसभाववाचक संज्ञामिठास, खटास
ईविशेषण/स्त्रीलिंगलोहारी, देशी
ईयविशेषणभारतीय, राष्ट्रीय
इकविशेषणऐतिहासिक, सामाजिक
वान/वालायुक्तधनवान, दुकानवाला
हीन/रहितबिनाधनहीन, जलरहित

Worked Examples

प्रश्न 1: 'अनुशासन' में उपसर्ग और मूल शब्द बताइए।

हल:

  • उपसर्ग = अनु (पीछे/अनुकूल)
  • मूल शब्द = शासन
  • अर्थ = नियम के अनुसार व्यवहार

प्रश्न 2: 'मिठास' में कौन-सा प्रत्यय है और मूल शब्द क्या है?

हल:

  • मूल शब्द = मीठा
  • प्रत्यय = आस (भाववाचक संज्ञा बनाने वाला)
  • मीठा → मिठास (ध्वनि परिवर्तन पर ध्यान दें)

प्रश्न 3: 'बेईमान' शब्द में उपसर्ग पहचानिए।

हल:

  • उपसर्ग = बे (उर्दू — बिना)
  • मूल शब्द = ईमान
  • अर्थ = जिसमें ईमान न हो

Common Mistakes

❌ गलत समझ✅ सही समझ
'प्रतिदिन' में 'दिन' उपसर्ग है।'प्रति' उपसर्ग है; 'दिन' मूल शब्द। उपसर्ग सदा आगे जुड़ता है।
'आस' और 'इक' को एक जैसा मानना।'आस' भाववाचक संज्ञा बनाता है (मिठास); 'इक' विशेषण बनाता है (ऐतिहासिक)।
'अनजान' में संस्कृत 'अ' उपसर्ग समझना।यहाँ हिंदी/तद्भव 'अन' उपसर्ग है; 'जान' हिंदी शब्द है।
प्रत्यय जोड़ते समय मूल शब्द की वर्तनी वैसी ही रखना।मूल शब्द में ध्वनि-परिवर्तन हो सकता है: मीठा → मिठास, सुंदर → सौंदर्य।
कृत् और तद्धित प्रत्यय में अंतर न करना।कृत् = धातु (क्रिया) में; तद्धित = संज्ञा/विशेषण में।

Quick Reference

  1. उपसर्ग आगे, प्रत्यय पीछे — शब्द की शुरुआत देखो → उपसर्ग; अंत देखो → प्रत्यय।
  2. संस्कृत उपसर्ग = 20 (अ, अनु, अप, अभि, आ, उप, दुर्, नि, निर्, परा, परि, प्र, प्रति, वि, सम्, सु, कु, अव, अति, अधि)।
  3. 'बे', 'ना', 'बद', 'ला' = उर्दू उपसर्ग — निषेध/अभाव का अर्थ।
  4. 'ता', 'त्व', 'पन', 'आस' = भाववाचक संज्ञा बनाने वाले प्रत्यय।
  5. 'इक', 'ईय' = विशेषण बनाने वाले प्रत्यय।
  6. परीक्षा ट्रिक: शब्द को दो भागों में तोड़ो → पहला हिस्सा अर्थ-हीन लगे तो वह उपसर्ग है।

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