LPG सुधार 1991 — अध्ययन नोट्स
अवलोकन
1991 के आर्थिक सुधार भारतीय आर्थिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ हैं। गंभीर भुगतान संतुलन संकट, विदेशी मुद्रा भंडार मात्र दो सप्ताह के आयात तक सीमित, और नियंत्रण से बाहर मुद्रास्फीति के सामने, भारत को अपनी आर्थिक नीति को मौलिक रूप से पुनर्गठित करने के लिए बाध्य किया गया। प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव और वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा 24 जुलाई, 1991 को घोषित नई आर्थिक नीति ने दशकों के राज्य नियंत्रण को समाप्त किया और उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (LPG) के युग का सूत्रपात किया।
UPSSSC PET के लिए, यह विषय महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सुधार-पूर्व समाजवादी नियोजन और आधुनिक भारत की बाजार-संचालित अर्थव्यवस्था को जोड़ता है। प्रश्न अक्सर यह समझने की परीक्षा लेते हैं कि क्या बदला (लाइसेंसिंग समाप्त, टैरिफ कम), यह क्यों बदला (BOP संकट, पुरानी प्रणाली की अक्षमता), और मुख्य वास्तुकार (मनमोहन सिंह)। उम्मीदवारों को सुधारों के तीन स्तंभ—उदारीकरण (घरेलू व्यवसाय को मुक्त करना), निजीकरण (सार्वजनिक क्षेत्र के प्रभुत्व को कम करना), और वैश्वीकरण (विश्व व्यापार के लिए खुलना)—और उनके तत्काल प्रभाव को जानना चाहिए।
1991 के बजट भाषण की मुख्य बातों, IMF शर्तों, और बाद की नीति परिवर्तनों (जैसे, MRTP संशोधन, FERA को FEMA द्वारा प्रतिस्थापित) से परिचितता तथ्यात्मक और विश्लेषणात्मक दोनों प्रश्नों को आत्मविश्वास से हल करने में मदद करेगी।
मुख्य अवधारणाएँ
- भुगतान संतुलन संकट (1991): जून 1991 तक, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार 1 बिलियन डॉलर तक गिर गए (2 सप्ताह के आयात के लिए पर्याप्त), बाहरी ऋण 70 बिलियन डॉलर से अधिक हो गया, मुद्रास्फीति 17% को छू गई, और राजकोषीय घाटा GDP के 8% को पार कर गया। संकट ने भारत को आपातकालीन ऋण के लिए बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ जापान के पास 47 टन सोना गिरवी रखने के लिए बाध्य किया।
- उदारीकरण: लाइसेंस राज के तहत औद्योगिक लाइसेंसिंग को हटाना (सुरक्षा/पर्यावरणीय क्षेत्रों को छोड़कर), प्रवेश बाधाओं में कमी, ब्याज दरों और कीमतों का विनियंत्रण (नियंत्रण-मुक्ति), और एकाधिकार तथा अवरोधक व्यापार व्यवहार अधिनियम (MRTP) के प्रतिबंधों को समाप्त करना। निजी क्षेत्र को पहले आरक्षित क्षेत्रों में प्रवेश की अनुमति दी गई।
- निजीकरण: विनिवेश (PSU में सरकारी इक्विटी बेचना), लगातार घाटे में चल रही इकाइयों को बंद करने, और दूरसंचार, विमानन और विद्युत जैसे क्षेत्रों को निजी निवेश के लिए खोलने के माध्यम से सार्वजनिक क्षेत्र के एकाधिकार में कमी। सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका प्रभुत्व से चुनिंदा क्षेत्रों में रणनीतिक उपस्थिति में बदल गई।
- वैश्वीकरण: आयात टैरिफ में कमी (अधिकतम दर चरणों में 300% से अधिक से घटाकर 1995-96 तक 50%), आयात लाइसेंसिंग को समाप्त करना, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) को कई क्षेत्रों में 51% तक स्वचालित अनुमोदन की अनुमति देना, और रुपये को चालू खाते पर परिवर्तनीय बनाना (मार्च 1992 में LERMS लागू, 1994 में चालू खाते पर पूर्ण परिवर्तनीयता) के माध्यम से विश्व अर्थव्यवस्था के साथ एकीकरण।
- मनमोहन सिंह का बजट भाषण: जुलाई 1991 का बजट भाषण विक्टर ह्यूगो को उद्धृत करने के लिए प्रसिद्ध है—"पृथ्वी की कोई भी शक्ति उस विचार को नहीं रोक सकती जिसका समय आ गया है"—जो सुधारों की अनिवार्यता का प्रतीक है। रुपये का अवमूल्यन (18-19%) पहले ही 1 और 3 जुलाई 1991 को हो चुका था; बजट ने सब्सिडी में कटौती की और प्रशासित कीमतें बढ़ाईं, तथा दोहरी विनिमय दर प्रणाली (LERMS) मार्च 1992 में आई।
- संरचनात्मक समायोजन कार्यक्रम (SAP): ऋण के लिए IMF-विश्व बैंक की शर्तों में राजकोषीय समेकन (घाटा कम करना), व्यापार उदारीकरण, सार्वजनिक क्षेत्र सुधार, और वित्तीय क्षेत्र का विनियंत्रण शामिल थे। इन शर्तों ने 1990 के दशक के लिए भारत के सुधार पथ को आकार दिया।
सूत्र / मुख्य तथ्य
- सुधारों का वर्ष: 1991 (24 जुलाई, 1991 बजट)
- प्रधानमंत्री: पी.वी. नरसिम्हा राव
- वित्त मंत्री: डॉ. मनमोहन सिंह
- विदेशी मुद्रा भंडार (जून 1991): 1 बिलियन डॉलर (मात्र 2 सप्ताह के आयात)
- बाहरी ऋण (1991): 70 बिलियन डॉलर से अधिक
- मुद्रास्फीति दर (1991): लगभग 17%
- राजकोषीय घाटा (1991): GDP के 8% से अधिक
- सोने की गिरवी: बैंक ऑफ इंग्लैंड को आपातकालीन ऋण के लिए 47 टन गिरवी रखा गया
- औद्योगिक लाइसेंस-मुक्ति: अनिवार्य लाइसेंस केवल 18 उद्योगों (जैसे रक्षा उपकरण, खतरनाक रसायन, तंबाकू, शराब) के लिए रखा गया, जिसे बाद में और घटाया गया; रेल परिवहन और परमाणु ऊर्जा सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित रहे
- टैरिफ में कमी: अधिकतम आयात शुल्क 300% से अधिक (1990-91) से घटाकर 50% (1995-96) किया गया
- FDI सीमा: प्राथमिकता क्षेत्रों में FDI के लिए 51% तक स्वचालित अनुमोदन
- MRTP संशोधन: बड़ी कंपनियों पर संपत्ति सीमा प्रतिबंध हटाए गए; प्रतिस्पर्धा फोकस पेश किया गया
- FERA → FEMA: विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम (FERA, 1973) को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA, 1999) द्वारा प्रतिस्थापित किया गया, नियंत्रण से प्रबंधन की ओर बदलाव
- चालू खाता परिवर्तनीयता: 1994 में प्राप्त (व्यापार लेनदेन के लिए रुपये परिवर्तनीय)
- नरसिम्हा राव सरकार: कांग्रेस की अल्पमत सरकार (1991-1996), बाहरी समर्थन से
हल किए गए उदाहरण
उदाहरण 1: भारत ने 1991 में LPG सुधार क्यों अपनाए?
चरण 1: तात्कालिक कारण की पहचान करें—भुगतान संतुलन संकट। जून 1991 में विदेशी मुद्रा भंडार गिरकर 1 बिलियन डॉलर के नाजुक स्तर पर आ गए, जिससे भारत की तेल और खाद्य जैसे आवश्यक आयात के लिए भुगतान करने की क्षमता को खतरा हुआ।
चरण 2: संरचनात्मक समस्याओं पर ध्यान दें—लाइसेंस राज के दशकों ने अक्षमताएँ पैदा कीं; सार्वजनिक क्षेत्र के एकाधिकार हानि वाले थे; उच्च टैरिफ ने भारतीय सामानों को विश्व स्तर पर अप्रतिस्पर्धी बना दिया; सब्सिडी और PSU हानि के कारण राजकोषीय घाटा बढ़ गया।
चरण 3: बाहरी दबाव—IMF और विश्व बैंक ने संरचनात्मक सुधारों के लिए शर्त के साथ आपातकालीन ऋण की पेशकश की (संरचनात्मक समायोजन कार्यक्रम)।
उत्तर: भारत ने तीव्र BOP संकट (विदेशी मुद्रा 2 सप्ताह के आयात तक नीचे), लाइसेंस राज से दीर्घकालिक अक्षमताएँ, बढ़ता राजकोषीय घाटा, और बेलआउट (राहत) ऋण के लिए IMF की शर्तों के कारण LPG सुधार अपनाए।
उदाहरण 2: उदारीकरण क्या है? 1991 में लिए गए दो ठोस उपाय दें।
चरण 1: परिभाषित करें—उदारीकरण का अर्थ है सरकारी नियंत्रण को कम करना और आर्थिक निर्णय लेने में बाजार बलों को अधिक भूमिका देना।
चरण 2: उपाय 1—अधिकांश उद्योगों के लिए औद्योगिक लाइसेंसिंग को समाप्त करना (अनिवार्य लाइसेंस केवल 18 उद्योगों के लिए रखा गया)।
चरण 3: उपाय 2—बड़ी फर्मों के विस्तार पर MRTP अधिनियम प्रतिबंधों को हटाना, संपत्ति सीमा को समाप्त करना।
उत्तर: उदारीकरण ने व्यवसाय पर राज्य नियंत्रण को कम किया। दो उपाय: (i) औद्योगिक लाइसेंस-मुक्ति—अधिकांश क्षेत्रों के लिए लाइसेंस राज को समाप्त किया; (ii) MRTP संशोधन—बड़ी कंपनियों पर संपत्ति सीमा हटाई, विस्तार को बढ़ावा दिया।
उदाहरण 3: 1991 के सुधारों के संदर्भ में निजीकरण और वैश्वीकरण में अंतर करें।
निजीकरण (आंतरिक फोकस): उत्पादन में सरकार की भूमिका को कम किया; PSU इक्विटी का विनिवेश शुरू किया; दूरसंचार/विमानन जैसे क्षेत्रों को निजी खिलाड़ियों के लिए खोला; सार्वजनिक क्षेत्र के एकाधिकार को कम करके दक्षता में सुधार का लक्ष्य रखा।
वैश्वीकरण (बाहरी फोकस): भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व व्यापार और निवेश के लिए खोला; आयात टैरिफ और कोटा में कटौती की; FDI प्रवाह की अनुमति दी; रुपये को चालू खाते पर परिवर्तनीय बनाया; भारत को वैश्विक बाजारों के साथ एकीकृत किया।
मुख्य अंतर: निजीकरण ने भारत के भीतर राज्य स्वामित्व को कम किया; वैश्वीकरण ने भारत को विदेशी प्रतिस्पर्धा और पूंजी के लिए खोला।
सामान्य गलतियाँ
- सुधारों को पूर्ण निजीकरण के साथ भ्रमित करना: छात्र अक्सर सोचते हैं कि 1991 का अर्थ तुरंत सभी PSU को बेचना था। गलत → 1991 ने क्रमिक विनिवेश शुरू किया; रणनीतिक PSU (रक्षा, परमाणु ऊर्जा) सार्वजनिक रहे। पूर्ण निजीकरण कभी लक्ष्य नहीं था; अक्षमता और राजकोषीय बोझ को कम करना था।
- यह मानना कि उदारीकरण = कोई विनियमन नहीं: कुछ लोग मानते हैं कि उदारीकरण का अर्थ शून्य सरकारी नियंत्रण था। गलत → उदारीकरण ने अनावश्यक नियंत्रण (लाइसेंस राज) को हटाया, लेकिन प्रतिस्पर्धा (प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002), उपभोक्ता संरक्षण, और पर्यावरणीय सुरक्षा के लिए विनियमन जारी रहा। यह विनियमन की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि बेहतर विनियमन के बारे में है।
- संकट संदर्भ को नजरअंदाज करना: "1991 सुधार क्यों?" का उत्तर देते समय BOP संकट, सोने की गिरवी, या IMF शर्तों का उल्लेख न करना सुधारों के पीछे की विवशता को अनदेखा करना है। सही दृष्टिकोण → हमेशा संरचनात्मक कारणों को सूचीबद्ध करने से पहले संकट रूपी तात्कालिक कारण से शुरू करें।
- FERA और FEMA को मिलाना: छात्र दोनों अधिनियमों को भ्रमित करते हैं या सोचते हैं कि दोनों 1991 में मौजूद थे। गलत → FERA (1973) नियंत्रण-उन्मुख सुधार-पूर्व कानून था; इसे 1999 में प्रबंधन-उन्मुख FEMA द्वारा प्रतिस्थापित किया गया। 1991 में, FERA अभी भी लागू था।
- तत्काल परिणामों को अतिशयोक्तिपूर्ण करना: यह दावा करना कि 1991 के सुधारों ने तुरंत सभी समस्याओं को हल कर दिया, गलत है। सही → सुधारों ने दिशा निर्धारित की; सकारात्मक प्रभाव जैसे उच्च वृद्धि (6-7%), बढ़ता FDI, गरीबी में कमी 1990 और 2000 के दशकों में धीरे-धीरे आए। प्रक्रिया क्रमिक और चल रही थी।
त्वरित संदर्भ
- 1991 LPG = उदारीकरण + निजीकरण + वैश्वीकरण BOP संकट के जवाब में।
- मुख्य तात्कालिक कारण: विदेशी मुद्रा भंडार 1 बिलियन डॉलर तक नीचे (जून 1991); आपातकालीन ऋण के लिए सोना गिरवी रखा गया।
- मनमोहन सिंह: वित्त मंत्री जिन्होंने ऐतिहासिक जुलाई 1991 बजट दिया; "ऐसा विचार जिसका समय आ गया है"।
- औद्योगिक लाइसेंसिंग: 1991 में 18 उद्योगों (जैसे रक्षा उपकरण, खतरनाक रसायन, तंबाकू, शराब) को छोड़कर सभी के लिए समाप्त।
- FDI और वैश्वीकरण: 51% तक स्वचालित FDI अनुमोदन; अधिकतम टैरिफ 300% से अधिक से घटाकर 50%; रुपये को चालू खाते पर परिवर्तनीय बनाया (1994)।
- सुधार = राज्य-नियंत्रित अर्थव्यवस्था से बाजार-संचालित अर्थव्यवस्था में बदलाव, रातोंरात नहीं बल्कि आधुनिक भारतीय विकास कहानी के लिए शुरुआती बिंदु।